क्विज़ खेलों और पैसे कमाओ

Download App from Google Play Store
किस्से कहानियाँ

परनिंदा का पाप हिन्दी लोक कथा Parninda Ka Paap Story in Hindi

एक राजा के दरबार में ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया । छप्पनभोग महल के खुले आंगन में बनवाए गए ।उसी वक्त अनजाने में एक हादसा हो गया ।

हमारे इस कहानी को भी पड़े : फ्योंली रौतेली हिन्दी लोक कथा

खुले में पक रही रसोई के ऊपर से एक चील अपने पंजे में जिंदा सांप दबोचकर निकल रही थी । सांप ने चील के पंजों से छुटकारा पाने के लिए फुफकार भरी और साथ ही जहर उगला । उसके मुख से निकली जहर की कुछ बूंदें पाकशाला में पक रही रसोई के व्यंजनों में गिर गईं । जहरीले भोजन के खाने से सभी ब्राह्मण काल के गाल में समा गए ।

जब राजा को इस बात का पता चला तो ब्रह्महत्या के पाप ने उसको दुखी कर डाला ऐसे में सबसे ज्यादा मुश्किल खड़ी हो गई यमराज के लिए कि आखिर इस पाप का भागी कौन है और ब्रह्महत्या के पाप के लिए किसको दंड दिया जाए ।

सबसे पहला नाम राजा का आया क्योंकि राजा ने ब्राह्मणों को भोजन के लिए आमंत्रित किया था । यमराज के मन में दूसरा नाम आया रसोइये का जिसने ब्राह्मणों लिए महाप्रसाद तैयार किया था । राजा को तीसरा ख्याल चील का आया जो सांप को पकड़कर ले जा रही थी ।

सबसे अंत में यमराज ने सांप के पाप पर विचार किया । लंबे समय तक यमराज अनिर्णय की स्थिति में रहे कि आखिर ब्रह्महत्या का दंड किसको दिया जाए ।

हमारे इस कहानी को भी पड़े : देवदार और उमा हिन्दी लोक कथा

घटना के कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने के लिए उसके महल में जा रहे थे । ब्राह्मणों ने एक महिला से महल का रास्ता पूछ लिया । तब महिला ने ब्राह्मणों को रास्ता बताते हुए कहा’ देखो भाई जरा ध्यान से जाना । वह राजा ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।

जैसे ही महिला ने यह बात कही यमराज ने फैसला कर लिया कि मृत ब्राह्मणों के पाप का फल इस महिला के खाते में जायेगा और यह दंड को भोगेगी ।
यमदूतों ने यमराज से पूछा -“प्रभु ऐसा क्यों ?”

तब यमराज ने कहा -‘जब कोई व्यक्ति पाप करता है तो उसको पापकर्म करने में बड़ा आनंद आता है । ब्राह्मणों की मौत से न तो राजा को, न रसोईये को, न चील को और न ही सांप को आनंद आया ये सभी इस अपराध से अनजान भी थे । महापाप की इस दुर्घटना का इस महिला ने जोर – शोर से बखान कर जरूर मजा लिया इसलिए ब्रह्महत्या का यह पाप इसके खाते में जाएगा । अक्सर हम यही सोचते हैं कि हमने कभी कोई बड़ा पाप नहीं किया है उसके बावजूद हमको किस बात का दंड मिल रहा ।
यह दंड वही होता है, जो हम परनिंदा का पाप कर संचित करते रहते हैं ।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button

Adblock Detected

गजब अड्डा के कंटेन्ट को देखने के लिए कृपया adblocker को disable करे, आपके द्वारा देखे गए ads से ही हम इस साइट को चलाने मे सक्षम है